
णिद्धणिद्धा ण बज्झंति, रुक्खरुक्खा य पोग्गला।
णिद्धलुक्खा य बज्झंति, रूवारूवी य पोग्गला॥612॥
अन्वयार्थ : स्निग्धगुणयुक्त पुद्गलों से स्निग्धगुणयुक्त पुद्गल बँधते नहीं हैं और रूक्षगुणयुक्त पुद्गलों से रूक्षगुणयुक्त पुद्गल बँधते नहीं हैं - यह कथन समान्य है, बंध भी होता है, उसका विशेष आगे कहेंगे। पुनश्च स्निग्धगुणयुक्त पुद्गलों से रूक्षगुण युक्त पुद्गल बँधते है । उन पुद्गलों की दो संज्ञा हैं - एक रूपी, एक अरूपी ॥612॥
जीवतत्त्वप्रदीपिका