
तिसयं भणंति केई, चउरुत्तरमत्थपंचयं केई।
उवसामगपरिमाणं, खवगाणं जाण तद्दुगुणं॥626॥
अन्वयार्थ : उपशमश्रेणीवाले आठवें, नौवें, दशवें, ग्यारहवें गुणस्थानवाले जीवों का प्रमाण कोई आचार्य तीन सौ कहते हैं, कोई तीन सौ चार कहते हैं, कोई दो सौ निन्यानवे कहते हैं। क्षपकश्रेणीवाले आठवें, नौवें, दशवें, बारहवें गुणस्थानवाले जीवों का प्रमाण उपशम श्रेणीवालों से दूना है ॥626॥
जीवतत्त्वप्रदीपिका