बत्तीसं अडदालं, सट्ठी वावत्तरी य चुलसीदी।
छण्णउदी अट्ठुत्तरसयमट्ठुत्तरसयं च खवगेसु॥628॥
अन्वयार्थ : क्षपक श्रेणी की संख्या उपशमवालों से दुगुनी होती है। इसलिये निरन्तर आठ समयों में क्षपकश्रेणी चढ़नेवालों की संख्या क्रम से बत्तीस, अड़तालीस, साठ, बहत्तर, चौरासी, छियानवे, एक सौ आठ, एक सौ आठ होती है ॥628॥

  जीवतत्त्वप्रदीपिका