चरमधरासाणहरा आणदसम्माण आरणप्पहुदिं।
अंतिमगेवेज्जंतं, सम्माणमसंखसंखगुणहारा॥638॥
अन्वयार्थ : सप्‍तम पृथ्वी के सासादन संबंधी भागहार से आनत-प्राणत के असंयत का भागहार असंख्यातगुणा है। तथा इसके आगे आरण-अच्युत से लेकर नौवें ग्रैवेयक पर्यन्त दश स्थानों में असंयत का भागहार क्रम से संख्यातगुणा-संख्यातगुणा है ॥638॥

  जीवतत्त्वप्रदीपिका