
तत्तो ताणुत्ताणं, वामाणमणुद्दिसाण विजयादि।
सम्माणं संखगुणो, आणदमिस्से असंखगुणो॥639॥
अन्वयार्थ : इसके अनन्तर आनत-प्राणत से लेकर नवम ग्रैवेयक पर्यंत के मिथ्यादृष्टि जीवों का भागहार क्रम से अंतिम ग्रैवेयक संबंधी असंयत के भागहार से संख्यातगुणा-संख्यातगुणा है। इस अंतिम गै्रवेयक संबंधी मिथ्यादृष्टि के भागहार से क्रमपूर्वक संख्यातगुणा-संख्यातगुणा नव अनुदिश और विजय, वैजयंत, जयंत, अपराजित के असंयतों का भागहार है। विजयादिकसंबंधी असंयत के भागहार से आनत-प्राणत संबंधी मिश्र का भागहार असंख्यातगुणा है ॥639॥
जीवतत्त्वप्रदीपिका