जीवतत्त्वप्रदीपिका
अयदो त्ति हु अविरमणं, देसे देसो पमत्त इदरे य।
परिहारो सामाइयछेदो छट्ठादि थूलो त्ति॥689॥
जीवतत्त्वप्रदीपिका