ओरालमिस्स साणे संढत्थीणं च वोच्छिदी होदि ।
वेगुव्वमिस्स साणे इत्त्थीवेदस्स वोच्छेदो ॥४०॥
औदारिकमिश्रस्य सासादने षंढस्त्रियोश्च व्युच्छित्ति: भवति ।
वैक्रियिकमिश्रस्य सासादने स्त्रीवेदस्य व्युच्छेद: ॥
अन्वयार्थ : औदारिकमिश्र के सासादन गुणस्थान में नपुंसकवेद, स्त्रीवेद की व्युच्छित्ति हो जाती है, वैक्रियकमिश्र के सासादन गुणस्थान में स्त्रीवेद की व्युच्छित्ति होती है ॥४०॥