
विंसदि परिहारे संढित्थीहारदुगवज्जिया एदे ।
सुहुमे णवआदिमजोगा संजलणलोहजुदा ॥५१॥
विंशति: परिहारे षंढस्त्री-आहारद्विकवर्जिता एते ।
सूक्ष्मे नवादिमयोगा संज्वलनलोभयुता: ॥
अन्वयार्थ : परिहारविशुद्धि संयम में नपुंसकवेद, स्त्रीवेद, आहारकद्विक से रहित २० आस्रव होते हैं । सूक्ष्मसांपराय में आदि के नौ योग, संज्वलन लोभ ये १० आस्रव होते हैं ॥५१॥