एदे पुण जहखादे कम्मणओरालमिस्ससंजुत्ता ।
संजलणलोहहीणा एगादसपच्चया णेया ॥५२॥
एते पुन: यथाख्याते कार्मणौदारिकमिश्रसंयुक्ता: ।
संज्वलनलोभहीना एकादशप्रत्यया ज्ञेया: ॥
अन्वयार्थ : यथाख्यात चारित्र में औदारिक मिश्र और कार्मण से सहित एवं संज्वलन लोभ से रहित १०±२·१२, १२-१·११ आस्रव होते हैं ॥५२॥