
ज्ञानमती :
सब धर्मों में चार कोटि से, भेद कहे नहिं जा सकते;;सत् या असत् उभय-अनुभय, इन चारों में ही दोष दिखे;;इसीलिए संतान और संतानी तत्त्व ‘अवाच्य’ कहे;;क्योंकि ये दोनों हि एक या, भिन्न नहीं यह बौद्ध कहें
सर्वांत-समस्त धर्मों में चार कोटि रूप विकल्प के कहने का अभाव होने से उन संतान और संतानी के तत्त्व-एकत्व और अन्यत्व-अनेकत्व धर्म अवाच्य हैं यदि बौद्ध ऐसा कहते है, तब तो आचार्य उसका स्पष्टीकरण करते हुए आगे कारिका में कहेंगे।
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