
ज्ञानमती :
तब तो चतुष्कोटि का विकल्प, अवक्तव्य है इस विध भी;;नहीं कथन हो सकता फिर सब, वस्तु विकल्पातीत हुई;;सब धर्मों से विरहित वस्तू, सदा अवस्तूरूप हुई;;चूँकि विशेष्य-विशेषण भी, उसमें हो सकता कभी नहीं
''चतुष्कोटि विकल्प अवक्तव्य है'' ऐसा भी नहीं कहा जा सकेगा, पुन: वे जीवादि पदार्थ असर्वांत-सभी धर्मों से रहित होते हुए अवस्तुरूप ही हो जायेंगे।
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