+ क्या कार्य कारण आदि सर्वथा भिन्न हैं ? -
कार्य-कारण-नानात्वं, गुणं-गुण्यन्यतापि च।
सामान्य-तद्वदन्यत्वं, चैकान्तेन यदीष्यते ॥61॥
अन्वयार्थ : [यदि एकांतेन कार्यकारणनानात्वं गुणगुण्यन्यतापि च] यदि आप एकांत से कार्य-कारण में और गुण-गुणी में भेद मानते हैं [सामान्यतद्वदन्यत्वं इष्यते] और सामान्य एवं सामान्यवान् में भी भेद मानते हैं, तब तो क्या दोष आता है उसे अगली कारिका में बताते हैं।

  ज्ञानमती 

ज्ञानमती :


कार्य और कारण में भेद, गुणी से गुण भी भिन्न रहे;;उसी तरह सामान्य और, सामान्यवान् भी पृथक् कहें;;वैशेषिक मत कहे सर्वथा, भिन्न-भिन्न गुण द्रव्य सभी;;पुन: वस्तु से सत्त्व पृथक हैं, अत:वस्तु हैं असत् सभी
कार्य कारण में सर्वथा भिन्नता है, गुण और गुणी में भी सर्वथा भिन्नता है एवं सामान्य और सामान्यवान् में सर्वथा भिन्नता है। यदि आप एकांत से ऐसा मानते हैं तो इस कारिका की अष्टसहस्री टीका में इनकी एकांत मान्यता देकर अगली कारिका में उसका निराकरण किया है।