
ज्ञानमती :
कार्य और कारण में भेद, गुणी से गुण भी भिन्न रहे;;उसी तरह सामान्य और, सामान्यवान् भी पृथक् कहें;;वैशेषिक मत कहे सर्वथा, भिन्न-भिन्न गुण द्रव्य सभी;;पुन: वस्तु से सत्त्व पृथक हैं, अत:वस्तु हैं असत् सभी
कार्य कारण में सर्वथा भिन्नता है, गुण और गुणी में भी सर्वथा भिन्नता है एवं सामान्य और सामान्यवान् में सर्वथा भिन्नता है। यदि आप एकांत से ऐसा मानते हैं तो इस कारिका की अष्टसहस्री टीका में इनकी एकांत मान्यता देकर अगली कारिका में उसका निराकरण किया है।
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