
ज्ञानमती :
क्षीर पिऊँगा यह व्रत जिसके, दही नहीं वह खाता है;;दधिव्रत वाला क्षीर न पीता, चूँकि क्षीर को त्यागा है;;गोरस त्यागी उभय न लेता, चूँकि द्रव्य पर दृष्टि धरे;;इससे वस्तू तत्त्व त्रयात्मक, सह ध्रुव व्यय उत्पाद धरें
जिसका दूध ही लेने का नियम है वह दधि को नहीं खाता है और जिसको दधि को लेने का नियम है वह दूध नहीं पीता है और जिसका गोरस का ही त्याग है वह दूध और दही दोनों को ही नहीं खाता है इसलिए तत्त्व भी त्रयात्मक है।
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