+ वस्तु तत्त्व त्रयात्मक है -
पयोव्रतो न दध्यत्ति, न पयोत्ति दधिव्रत:
अगोरसव्रतो नोभे, तस्मात्तत्त्वं त्रयात्मकम् ॥60॥
अन्वयार्थ : [पयोव्रतो न दधि अत्ति दधिव्रत: न पय: अत्ति] जिसको दूध पीने का व्रत है वह दही नहीं खाता है, दधि के नियम वाला दूध को नहीं पीता है [अगोरसव्रतो न उभे तस्मात् तत्त्वं त्रयात्मकं] और जिसको गो रस का त्याग है, वह दूध-दही दोनों को नहीं पीता है, इसीलिए वस्तु तत्त्व त्रयात्मक है।

  ज्ञानमती 

ज्ञानमती :


क्षीर पिऊँगा यह व्रत जिसके, दही नहीं वह खाता है;;दधिव्रत वाला क्षीर न पीता, चूँकि क्षीर को त्यागा है;;गोरस त्यागी उभय न लेता, चूँकि द्रव्य पर दृष्टि धरे;;इससे वस्तू तत्त्व त्रयात्मक, सह ध्रुव व्यय उत्पाद धरें
जिसका दूध ही लेने का नियम है वह दधि को नहीं खाता है और जिसको दधि को लेने का नियम है वह दूध नहीं पीता है और जिसका गोरस का ही त्याग है वह दूध और दही दोनों को ही नहीं खाता है इसलिए तत्त्व भी त्रयात्मक है।