
ज्ञानमती :
आश्रय बिन सामान्य और समवाय नहीं रहते प्रत्येक;;एक-एक द्रव्यादि नित्य में, समाप्त होते ये इक-एक;;पुन: नष्ट उत्पन्न अनित्यों कार्यों में कैसे होंगे?;;चूँकि नित्य ये दोनों उन, वस्तू में कैसे ठहरेंगे
जिस प्रकार से सामान्य सत्ता बिना आश्रय के नहीं रह सकता है, तथैव समवाय भी बिना आश्रय के नहीं रह सकता है और अपने आश्रयभूत प्रत्येक नित्य व्यक्तियों-पदार्थों में ये दोनों पूर्णरूप से रहते हैं। इसलिए नाशोत्पादादि-अनित्य पदार्थों में इनका विधान कैसे होगा अर्थात् इनका अस्तित्व वहाँ कैसे सिद्ध होगा ?
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