+ सामान्य समवाय भी परस्पर में भिन्न हैं -
सर्वथानभिसंबंध: सामान्यसमवाययो:।
ताभ्यामर्थो न संबद्धस्तानि त्रीणि खपुष्पवत् ॥66॥
अन्वयार्थ : [सामान्यसमवाययो: सर्वथा अनभिसंबंध:] सामान्य और समवाय का सर्वथा ही परस्पर में कोई संबंध नहीं है [ताभ्यां अर्थो न संबद्ध: तानि त्रीणि खपुष्पवत्] तब उन दोनों के साथ द्रव्य गुण आदि अर्थ भी संबंधित नहीं है पुन: सामान्य समवाय और पदार्थ ये तीनों ही आकाशपुष्पवत् असत् ठहरते हैं।

  ज्ञानमती 

ज्ञानमती :


आपस में सामान्य और, समवाय सदा संबंध रहित;;इन दोनों से द्रव्य गुणादिक, पदार्थ नहिं हैं संबंधित;;इसीलिए सामान्य तथा, समवाय अर्थ ये तीनों ही;;गगनकुसुमवत् ‘असत्’ अवस्तू हो जावे परमत में ही
सामान्य और समवाय का सर्वथा-संयोगादि प्रकार से संबंध नहीं है। क्योंकि संयोग दो द्रव्यों में ही होता है और इन दोनों के द्वारा अर्थ- पदार्थ संबंधित नहीं होता है। अत: सामान्य-समवाय और पदार्थ ये तीनों ही खपुष्प के समान असत् हो जायेंगे।