+ काल का व्यवधान होने पर भी कार्य-कारण भाव मानने का खण्डन -
भाव्यतीतयोर्मरणजाग्रद्बोधयोरपि नारिष्टोद्बोधौ प्रतिहेतुत्वम् ॥58॥
अन्वयार्थ : [भाव्यतीतयोः मरणजाग्रद्बोधयोः] भावी-मरण और अतीत-जाग्रतबोध के [अपि] भी [अरिष्टोद्बोधौ] अरिष्ट (अपशकुन) और उद्बोध के [प्रतिहेतुत्वम्] प्रति हेतुपना [न] नहीं है। (अर्थात् भावी-मरण अरिष्ट का कारण नहीं है तथा सोने के पूर्व अवस्था का ज्ञान जागने के बाद के ज्ञान / उद्बोध का कारण नहीं है।)
Meaning : The approaching-death and the knowledge-before sleeping are not the causes (kārana) of bad-omens (arishta) and knowledge-after-waking (udbodha), respectively.

  टीका