+ अविरुद्धकार्योपलब्धि (कार्यहेतु) का उदाहरण -
अस्त्यत्र देहिनि बुद्धिर्व्याहारादेः ॥62॥
अन्वयार्थ : [अत्र] इस [देहिनि] देही (शरीरधारी प्राणी) में [बुद्धिः] बुद्धि [अस्ति] है [व्याहारादेः] क्योंकि बुद्धि के कार्य वचनादिक पाये जाते हैं। (यहाँ पर बुद्धि के अविरुद्ध कार्य वचनादिक की उपलब्धि है, इसलिए यह अविरुद्धकार्योपलब्धि हेतु है।)
Meaning : This possessor-of-the-body (dehī, jīva) has the intellect (buddhi) because in it are found the speech (vacana), etc.

  टीका