+ अविरुद्ध उत्तरचरोपलब्धि (उत्तरचरहेतु) का उदाहरण -
उद्गाद् भरणिः प्राक्तत एव ॥65॥
अन्वयार्थ : [भरणिः] भरणी का [उद्गाद्] उदय [प्राक्] एक मुहूर्त के पूर्व [एव] ही हो चुका है, क्योंकि [ततः] उस (कृत्तिका का) उदय पाया जाता है।
Meaning : The star Bharanī had arisen (forty-eight minutes - one muhūrta earlier) because the star Kruttikā is appearing.

  टीका