+ अविरुद्धस्वभावानुपलब्धि का उदाहरण -
नास्त्यत्र भूतले घटोऽनुपलब्धेः ॥75॥
अन्वयार्थ : इस भूतल पर घट नहीं है क्योंकि उपलब्धि योग्य स्वभाव के होने पर वह भी नहीं पाया जा रहा है ।

  टीका 

टीका :

इस भूतल पर घड़ा नहीं है, क्योंकि उपलब्ध नहीं है । यहाँ पर घट के प्राप्त होने रूप स्वभाव का भूतल में अभाव है, इसलिए वह घड़े के अभाव को सिद्ध करता है । अर्थात् प्रतिषेध योग्य घट के अविरुद्धस्वभाव का (अभाव) अनुपलम्भ है । इसलिए यह हेतु अविरुद्ध स्वाभावानुपलब्धि हुआ ।