
टीका :
इस भूतल पर घड़ा नहीं है, क्योंकि उपलब्ध नहीं है । यहाँ पर घट के प्राप्त होने रूप स्वभाव का भूतल में अभाव है, इसलिए वह घड़े के अभाव को सिद्ध करता है । अर्थात् प्रतिषेध योग्य घट के अविरुद्धस्वभाव का (अभाव) अनुपलम्भ है । इसलिए यह हेतु अविरुद्ध स्वाभावानुपलब्धि हुआ । |