+ अविरुद्धव्यापकानुपलब्धि हेतु -
नास्त्यत्र शिंशपा वृक्षानुपलब्धेः ॥76॥
अन्वयार्थ : यहाँ पर शीशम नहीं है, क्योंकि वृक्ष की अनुपलब्धि है ।

  टीका 

टीका :

यहाँ पर शीशम नहीं है, वृक्ष की अनुपलब्धि है । व्यापक वृक्ष के बिना व्याप्य स्वरूप शिंशपा हो नहीं सकता, अर्थात् यहाँ व्यापक वृक्ष की अनुपलब्धि व्याप्य शीशम के प्रतिषेध को सिद्ध करती है । इसलिए यह हेतु अविरुद्धव्यापकानुपलब्धि हेतु प्राप्त हुआ ।