
टीका :
यहाँ पर शीशम नहीं है, वृक्ष की अनुपलब्धि है । व्यापक वृक्ष के बिना व्याप्य स्वरूप शिंशपा हो नहीं सकता, अर्थात् यहाँ व्यापक वृक्ष की अनुपलब्धि व्याप्य शीशम के प्रतिषेध को सिद्ध करती है । इसलिए यह हेतु अविरुद्धव्यापकानुपलब्धि हेतु प्राप्त हुआ । |