+ विरुद्धकार्यानुपलब्धि हेतु का उदाहरण -
यथास्मिन्प्राणिनि व्याधिविशेषोऽस्ति निरामयचेष्टानुपलब्धेः ॥83॥
अन्वयार्थ : इस प्राणी में व्याधि-विशेष है क्योंकि निरामय (रोग रहित) चेष्टा नहीं पाई जाती है ।

  टीका 

टीका :

इस प्राणी में व्याधि विशेष है, निरामय चेष्टा नहीं होने से । यहाँ पर व्याधि विशेष के सद्भाव साध्य से विरोधि व्याधि विशेष के अभाव के कार्य नीरोग चेष्टा की अनुपलब्धि है । इसलिए यह हेतु विरुद्ध कार्यानुपलब्धि हेतु हुआ ।