+ विरुद्धकारणानुपलब्धि हेतु -
अस्त्यत्र देहिनि दुःखमिष्टसंयोगाभावात् ॥84॥
अन्वयार्थ : इस प्राणी में दुःख है क्योंकि इष्ट संयोग का अभाव है ।

  टीका 

टीका :

इस प्राणी में दुःख है, क्योंकि इष्ट संयोग का अभाव है । यहाँ पर दुःख के विरोधी सुख के कारण इष्ट संयोग का अभाव दुःख के सद्भाव को सिद्ध करता है, इसलिए यहाँ पर हेतु इष्ट संयोग अभावपना विरुद्धकारणानुपलब्धि हेतु जानना चाहिए ।