+ उक्त हेतु की क्या संज्ञा है? -
कार्यकार्यमविरुद्धकार्योपलब्धौ ॥88॥
अन्वयार्थ : कार्य के कार्यरूप उक्त हेतु का अविरुद्धकार्योपलब्धि में अन्तर्भाव होता है ।

  टीका 

टीका :

कार्यकार्य रूप हेतु का अविरुद्धकार्योपलब्धि में ही अन्तर्भाव हो जाता है ।

विशेष : उक्त उदाहरण में शिवक का कार्य छत्रक है और उसका कार्य स्थास है, इस प्रकार यह स्थास शिवक के कार्य का अविरोधी कार्य होने से परम्परा से अविरुद्धकार्योपलब्धि में अन्तर्भूत होता है।