
वैशद्यैऽपि परोक्षं तदाभासं मीमांसकस्य करणज्ञानवत् ॥7॥
अन्वयार्थ : विशदज्ञान को भी परोक्ष मानना परोक्षाभास है। जैसे - मीमांसक करणज्ञान को परोक्ष मानते हैं, उनका ऐसा मानना परोक्षाभास है।
टीका
टीका :
विशद ज्ञान को भी परोक्ष मानना परोक्षाभास कहा जाता है। जैसे - मीमांसक के करणज्ञान को परोक्षाभास जानना चाहिए।
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