अन्वयार्थ : शब्द परिणामी है, क्योंकि चाक्षुष है, यह अविद्यमान सत्ता वाले स्वरूपासिद्ध हेत्वाभास का उदाहरण हैं।
टीका
टीका :
शब्द परिणामी है चाक्षुष होने से। इसमें यह चाक्षुषपना हेतु स्वरूप से ही असिद्ध है। क्योंकि शब्द नेत्र से नहीं जाना जाता किन्तु कर्ण से जाना जाता है इसलिए अविद्यमान सत्तावाला होने से स्वरूपासिद्ध है।