
टीका :
नित्य आकाश विपक्ष में भी इस प्रमेयत्व हेतु के रहने का निश्चय है। इसलिए प्रमेयत्व हेतु निश्चित विपक्षवृत्ति है। प्रमेयत्व हेतु पक्ष शब्द में और सपक्ष घट में रहता हुआ अनित्य के विपक्षी नित्य आकाश में भी रहता है, क्योंकि आकाश भी निश्चत रूप से प्रमाण का विषय है। |