अन्वयार्थ : शब्द अनित्य है, प्रमेय होने से। जैसे-घट।
टीका
टीका :
शब्द अनित्य है, प्रमेय होने से, घट के समान । यह प्रमेय हेतु पक्ष में (शब्द में) सपक्ष में (घट में) अथवा विद्यमान होने पर भी विपक्ष आकाश में भी उसकी वृत्ति निश्चित हुई। इसलिए, निश्चित विपक्षवृत्ति हेतु कहते हैं।