+ आगमाभास -
रागद्वेषमोहाक्रान्तपुरुषवचनाज्जातमागमाभासम् ॥51॥
अन्वयार्थ : रागद्वेषमोह से आक्रान्त (व्याप्त) पुरुष के वचनों से उत्पन्न हुए पदार्थ के ज्ञान को आगमाभास कहते हैं।

  टीका 

टीका :

रागियों के, द्वेषियों के और अज्ञानियों के वचनों के द्वारा . उत्पन्न आगम को आगमाभास जानना चाहिए।