+ संख्याभास -
प्रत्यक्षमेवैकं प्रमाणमित्यादि संख्याभासम् ॥55॥
अन्वयार्थ : ्रत्यक्ष ही एक प्रमाण है, इत्यादि रूप से सर्व संख्याभास है।

  टीका 

टीका :

प्रत्यक्ष और परोक्ष के भेद से प्रमाण दो प्रकार का है, यह पहले कहा गया है, उससे विपरीत प्रत्यक्ष ही एक प्रमाण है अथवा प्रत्यक्ष और अनुमान ये ही दो प्रमाण हैं, अन्य नहीं है, ऐसी अवधारणा करना भी संख्याभास है।