+ संभवदन्यद्विचारणीयम् ॥74॥ -
अन्य ग्रन्थों में नयादि तत्त्व
अन्वयार्थ : संभव अन्य (नय-निक्षेपादि) भी विचारणीय है।

  टीका 

टीका :

इस ग्रन्थ में केवल प्रमाण विवेचन को कहा गया है, इससे भिन्न नयादि तत्त्वों का विवेचन अन्य ग्रन्थों से जानना चाहिए या देखना चाहिए।

न्याय - विभिन्न प्रमाणों द्वारा वस्तुतत्त्व की परीक्षा करना।

न्याय दर्शन का उद्देश्य - प्रमाणों के द्वारा प्रमेय (जानने योग्य) वस्तु का विचार करना और प्रमाणों का विस्तृत विवेचन करना

प्रश्न – न्याय दर्शन में किन सत् पदार्थों के तत्त्वज्ञान से मोक्ष की प्राप्ति होती है ?

उत्तर –
प्रमाण, प्रमेय, संशय, प्रयोजन, दृष्टान्त, सिद्धान्त, अवयव, तर्क, निर्णय, वाद, जल्प, वितण्डा, हेत्वाभास, छल, जाति, निग्रहस्थान इन सोलह सत् पदार्थों के तत्त्वज्ञान से मोक्ष की प्राप्ति होती है, अतः इनका परिज्ञान करना आवश्यक है।