टीका
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उपसंहार
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परीक्षामुखमादर्शी, हेयोपादेयतत्त्वयोः ।
संविदे मादृशो बालः, परीक्षादक्षवद् व्यधाम ॥
अन्वयार्थ :
छोड़ने योग्य और ग्रहण करने योग्य तत्त्व के ज्ञान के लिए दर्पण के समान इस परीक्षामुख ग्रन्थ को मुझ सदृश बालक ने परीक्षा में निपुण पुरुष के समान रचा।
टीका