पं-रत्नचन्द-मुख्तार
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असद्भूत व्यवहार-नय के प्रकार
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असद्भूतव्यवहारो द्विविधः उपचरितानुपचरितभेदात् ॥226॥
अन्वयार्थ :
उपचरित और अनुपचरित के भेद से असद्भूतव्यवहार नय भी दो प्रकार का है ।
मुख्तार
मुख्तार :
असद्भूत व्यवहारनय के दो भेद हैं - १. उपचरितासद्भूत व्यवहारनय, २. अनुपचरितासद्भूत व्यवहारनय । इनका स्वरूप क्रमशः सूत्र २२७ व २२८ में कहा जायगा ।