
जं सामण्णग्गहणं दंसणमेयं विसेसियं णाणं ।
दोण्ह वि णयाण एसो पाडेक्कं अत्थपज्जाओ ॥1॥
अन्वयार्थ : [जं] जो [सामण्णं] सामान्य का [गहणं] ग्रहण है, वह [एयं] यह [दंसणं] दर्शन है [विसेसियं] विशेष रूप से जानना [णाणं] ज्ञान है [दोण्ह] दोनों [वि] भी ही [णयाण] नयों के [पाडेक्कं] प्रत्येक पृथक-पृथक् रूप से [एसो] यह अर्थबोध सामान्य [अत्थपज्जाओ] अर्थपर्याय है ।
Meaning : Perception is the cognition of the general and knowledge means the cognition of the particular. This is the import of the two Nayas respectively.
विशेष