+ अवधिज्ञान में दर्शन शब्द का प्रयोग उपयुक्त -
जं अप्पुट्ठा भावा ओहिण्णाणस्स होंति पच्चक्खा ।
तम्हा ओहिण्णाणे दंसणसद्दो वि उवउत्तो ॥29॥
अन्वयार्थ : [जं] क्योंकि [अप्पुट्ठा] अस्पृष्ट [भावा] पदार्थ [ओहिण्णाणस्स] अवधिज्ञान के [पच्चक्खा होंति] प्रत्यक्ष होते हैं [तम्हा ओहिणाणे] इसलिए अवधिज्ञान में [वि] भी [दंसणसदो] दर्शन शब्द [उवउत्तो] उपयुक्त है ।
Meaning : There can be also Avadhi-darsana because by Avadhi-gyana things though untouched are directly comprehended. It means that as there is Avadhi-gyana there is also Avadhi-darsana.

  विशेष 

विशेष :

जिस प्रकार मतिज्ञान में दर्शन शब्द प्रयुक्त होता है, वैसे ही यह अवधिज्ञान में भी लागू होता है, क्योंकि अवधिज्ञान भी इन्द्रियों की सहायता से अस्पृष्ट एवं अग्राह्य पदार्थों को स्पष्ट रूप से प्रत्यक्ष जानता है । दर्शन शब्द की व्याख्या के अनुसार अस्पृष्ट पदार्थ अवधिज्ञान के प्रत्यक्ष होते हैं, इसलिए अवधिज्ञान में दर्शन शब्द का प्रयुक्त होना उपयुक्त है ।