
विशेष :
केवली भगवान् नियम से अस्पृष्ट पदार्थों को जानते, देखते हैं, इसलिए उनमें ज्ञान, दर्शन भेदविहीन सिद्ध होता है । यह पहले ही कहा जा चुका है कि केवली परमात्मा सम्पूर्ण पदार्थों को युगपत् जानते, देखते हैं, इसलिए तीनों लोकों के पदार्थ उनके ज्ञान से स्पृष्ट नहीं होते हैं । वे समस्त पदार्थों का साक्षात् रूप से ग्रहण करते हैं, जिससे उनमें अनन्त दर्शन और अनन्त ज्ञान रूप एक ही उपयोग सिद्ध होता है। |