विशेष : अष्टांग योग
- यम
- नियम
- आसन
- प्राणायाम
- प्रत्याहार -- जो प्रशांत-बुद्धि-विशुद्धता युक्त मुनि अपनी इंद्रियाँ और मन को इंद्रियों के विषयों से खैंच कर जहाँ-जहाँ अपनी इच्छा हो तहाँ-तहाँ धारण करें सो प्रत्याहार कहा जाता है -- ज्ञानार्णव । मन की प्रवृत्ति का संकोच कर लेने पर जो मानसिक संतोष होता है उसे प्रत्याहार कहते हैं । -- म.पु.
- धारणा
- ध्यान
- समाधि
|