+ ज्ञान और चारित्र के नाम -
(दोहरा)
ज्ञान बोध अवगम मनन, जगतभान जगजान ।
संजम चारित आचरन, चरन वृत्ति थिरवान ॥४८॥
अन्वयार्थ : (दोहरा)
ज्ञान बोध अवगम मनन, जगतभान जगजान ।
संजम चारित आचरन, चरन वृत्ति थिरवान ॥४८॥