
रूप-रसवंत मूरतीक एक पुदगल,
रूप बिनुऔरु यौं अजीवदर्व दुधा है ।
चारि हैं अमूरतीक जीव भी अमूरतीक,
याहितैं अमूरतीक-वस्तु-ध्यान मुधा है ॥
औरसौं न कबहूं प्रगट आप आपुही सौं,
ऐसौ थिर चेतन-सुभाउ सुद्धसुधा है ।
चेतनकौ अनुभौ अराधैं जग तेई जीव,
जिन्हकौं अखंड रस चाखिवे की छुधा है ॥११॥