+ मूढ़ स्वभाव -
((सवैया तेवीसा))
चेतन जीव अजीव अचेतन, लच्छन-भेद उभैपद न्यारे ।
सम्यक्दृष्टि-उदोत विचच्छन, भिन्न लखै लखिकैं निरधारे ॥
जे जगमांहि अनादि अखंडित, मोह महामद के मतवारे ।
ते जड़ चेतन एक कहैं, तिन्ह की फिरि टेक टरै नहि टारे ॥१२॥