((सवैया इकतीसा))
एक परिनाम के न करता दरव दोइ,
दोइ परिनाम एक दर्व न धरतु है ॥
एक करतूति दोइ दर्व कबहूँ न करै
दोइ करतूति एक दर्व न करतु है ॥
जीव पुदगल एक खेत-अवगाही दोउ,
अपनें अपनें रूप कोउ न टरतु है ।
जड परनामनिकौ करता है पुदगल,
चिदानंद चेतन सुभाउ आचरतु है ॥10॥