((सवैया तेवीसा))
दर्वित आस्रव सो कहिए जहं,
पुग्गल जीवप्रदेस गरासै ।
भावित आस्रव सो कहिए जहं,
राग विरोध विमोह विकासै ॥
सम्यक पद्धति सो कहिए जहं,
दर्वित भावित आस्रव नासै ।
ज्ञान कला प्रगटै तिहि थानक,
अंतर बाहिर और न भासै ॥३॥