(
(अडिल्ल छंद)
)
भेदज्ञान संवर-निदान निरदोष है ।
संवरसौं निरजरा, अनुक्रम मोष है ॥
भेदज्ञान सिवमूल, जगतमहि मानिये ।
जदपि हेय है तदपि, उपादेय जानिये ॥६॥