+ निर्विकल्प समाधि द्वारा मोह टूटता है -
जो आयासइ मणु धरइ लोयालोय-पमाणु ।
तुट्टइ मोहु तडत्ति तसु पावइ परहँ पवाणु ॥164॥
यः आकाशे मनो धरति लोकालोकप्रमाणम् ।
त्रुटयति मोहो झटिति तस्य प्राप्नोति परस्य प्रमाणम् ॥१६४॥
अन्वयार्थ : [यः आकाशे] जो निर्विकल्प-समाधि में [मनः धरति] मन स्थिर करता है, [तस्य मोहः] उसका मोह [झटिति त्रुटयति] शीघ्र टूटता है, [परस्य प्रमाणम्] लोकालोक प्रमाण आत्मा को [प्राप्नोति] प्राप्त हो जाता है ।
Meaning : One who in his mind thinks of Atman as equal, like Akasha, to Lokaloka, has his Moha soon destroyed and attains to the Parama-Pada (highest status).

  श्रीब्रह्मदेव