
अद्धुम्मीलिय-लोयणिहिँ जोउ कि झंपियएहिँ ।
एमुइ लव्भइ परम-गइ णिच्चिंतिं ठियएहिँ ॥169॥
अर्धोन्मीलितलोचनाभ्यां योगः किं झंपिताभ्याम् ।
एवमेव लभ्यते परमगतिः निश्चिन्तं स्थितैः ॥१६९॥
अन्वयार्थ : [अर्धोन्मीलितलोचनाभ्यां] आधे ऊघड़े हुए नेत्रों करना अथवा [झंपिताभ्याम्] नेत्रों को बंद करना [किं] क्या [योगः] ध्यान है? [निश्चिन्तं स्थितैः] चिन्ता-रहित स्थित को [एवमेव] इसी तरह [लभ्यते परमगतिः] परमगति मिलती है ।
Meaning : The Parama-Pada cannot be obtained by keeping one's eyes half opened or wholly shut. It can be obtained only by removing the unsteadiness of mind.
श्रीब्रह्मदेव