
मोक्खु म चिंतहि जोइया मोक्खु ण चिंतिउ होइ ।
जेण णिबद्धउ जीवडउ मोक्खु करेसइ सोइ ॥188॥
मोक्षं मा चिन्तय योगिन् मोक्षो न चिन्तितो भवति ।
येन निबद्धो जीवः मोक्षं करिष्यति तदेव ॥१८८॥
अन्वयार्थ : [योगिन्] हे योगी ! [मोक्षं माचिंतय] मोक्ष की भी चिन्ता मत कर, [मोक्षः] मोक्ष [चिंतितो न भवति] चिन्ता करने से नहीं होता, [येन निबद्धः] जिन ने बाँधा है [जीवः] जीव को [तदेव] वे कर्म ही [मोक्षं] मोक्ष [करिष्यति] करेंगे ।
Meaning : O Yogin ! Entertain not anxiety even for Moksha. It is not to be obtained by Chinta. Release thy Jiva from what has got him in bondage.
श्रीब्रह्मदेव