+ सिद्ध भगवान -
झाणेँ कम्मक्खउ करिवि मुक्कउ होइ अणंतु ।
जिणवरदेवइँ सो जि जिय पभणिउ सिद्ध महंतु ॥201॥
ध्यानेन कर्मक्षयं कृत्वा मुक्तो भवति अनन्तः ।
जिनवरदेवेन स एव जीव प्रभणितः सिद्धो महान् ॥२०१॥
अन्वयार्थ : [ध्यानेन कर्मक्षयं कृत्वा] ध्यान द्वारा कर्मों का क्षय करके [मुक्तः भवति] जो मुक्त होता है, [अनंतः] और अविनाशी है, [जीव] हे जीव ! [स एव] उसे ही [जिनवरदेवेन] जिनवरदेव ने [महान् सिद्धः प्रभणितः] सबसे महान् सिद्ध भगवान् कहा है ।
Meaning : Shri Jinendra Devas have described that Jiva as the Siddha (perfect) Mahant (the supreme saint) who has destroyed his Karmas and obtained absolute, everlasting freedom by the power of self-contemplation.

  श्रीब्रह्मदेव