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जे परमप्पहँ भत्तियर विसय ण जे वि रमंति ।
ते परमप्प-पयासयहँ मुणिवर जोग्ग हवंति ॥208॥
ये परमात्मनो भक्ति पराः विषयान् न येऽपि रमन्ते ।
ते परमात्मप्रकाशकस्य मुनिवरा योग्या भवन्ति ॥२०८॥
अन्वयार्थ : [ये] जो [परमात्मनः भक्तिपराः] परमात्मा की भक्ति करते हैं, [ये] जो [विषयान् न अपि रमंते] विषय-कषायों में नहीं रमते हैं, [ते मुनिवराः] वे ही मुनीश्वर [परमात्मप्रकाशस्य योग्याः] परमात्मप्रकाश के योग्य [भवंति] हैं ।
Meaning : Those Munis who are Bhakta (devotees) of Parmatma Pada ard do not give their heart to sensual pleasures, are alone fit to comprehend the Parmatma Prakasha.

  श्रीब्रह्मदेव