
पश्यन्तो जन्मकान्तारे प्रवेशं पुण्य-पापत: ।
विशेषं प्रतिपद्यन्ते न तयो: शुद्धबुद्धय: ॥189॥
अन्वयार्थ : पुण्य-पापत: जन्मकान्तारे प्रवेशं पश्यन्त: शुद्धबुद्धय: तयो: विशेषं न प्रतिपद्यन्ते ।
पुण्य-पापरूप कर्म के कारण ही संसाररूपी दुःखद वन में प्रवेश होता है, यह जानकर शुद्धबुद्धिवाले जीव पुण्यपाप में भेद नहीं मानते ।