
मोहेन मलिनो जीव: क्रियते निजसंगत: ।
स्फटिको रक्त-पुष्पेण रक्ततां नीयते न किम् ॥229॥
अन्वयार्थ : रक्त-पुष्पेण किं स्फटिक: रक्ततां न नीयते? मोहेन निजसंगत: जीव: मलिन: क्रियते ।
जैसे लाल फूल के साथ संगति करने से ही स्वभाव से स्वच्छ / निर्मल स्फटिक लाल होता है; वैसे मोह के साथ संगति करने से ही शुद्ध-स्वभावी जीव मलिन होता है ।