
पूर्वोपार्जित-कर्मैक-देश-संक्षय-लक्षणा ।
निर्जरा जायते द्वेधा पाकजापाकजात्वतः ॥253॥
अन्वयार्थ : पूर्व-उपार्जित-कर्म-एकदेश-संक्षय-लक्षणा निर्जरा; पाकजा-अपाकजात्वत: द्विधा जायते ।
पूर्व बन्धे हुए ज्ञानावरणादि द्रव्य कर्मों का आंशिक विनाश हो जाना जिसका लक्षण है, उसे निर्जरा कहते हैं; उसके पाकजा निर्जरा और अपाकजा निर्जरा इसतरह दो भेद हैं ।